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गांव-गांव पहुंचा राजस्व प्रशासन: कोतरलिया शिविर में कलेक्टर की सख्ती, “मौके पर समाधान” बना अभियान का चेहरा

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़, 4 अप्रैल 2026।
जिले में इन दिनों राजस्व पखवाड़ा महज एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासन की जमीनी सक्रियता का सजीव उदाहरण बनकर उभर रहा है। गांव-गांव लग रहे शिविरों ने किसानों और ग्रामीणों को राहत की वह राह दिखाई है, जहां समस्याओं का समाधान अब फाइलों में नहीं, बल्कि मौके पर ही संभव हो रहा है।

इसी कड़ी में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने रायगढ़ तहसील के ग्राम पंचायत कोतरलिया में आयोजित राजस्व शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की हकीकत जानी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सीधे ग्रामीणों से संवाद किया—बात सिर्फ सुनने तक सीमित नहीं रही, बल्कि मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर आवेदन का निराकरण तय समय-सीमा में और नियमों के तहत सुनिश्चित किया जाए।

कलेक्टर की प्राथमिकता साफ नजर आई—अविवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, नक्शा बटांकन और व्यपवर्तन जैसे प्रकरणों को लंबित रखने की गुंजाइश अब नहीं है। उन्होंने इन मामलों के शत-प्रतिशत निराकरण पर जोर देते हुए अधिकारियों को चेताया कि शिविरों की सफलता कागजी आंकड़ों से नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान से मापी जाएगी।

शिविरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया—प्रक्रिया पारदर्शी हो, व्यवस्था सुव्यवस्थित हो और आमजन को सम्मानजनक वातावरण मिले। खासतौर पर फौती नामांतरण, बंटवारा और अभिलेख त्रुटि सुधार जैसे मामलों में ऑन-द-स्पॉट ऑनलाइन पंजीयन, सुनवाई और निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

प्रशासन यह भी समझ रहा है कि योजनाओं का लाभ तभी सार्थक है जब अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से कोटवारों और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इन शिविरों तक पहुंच सकें।

उधर, जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे ने पुसौर तहसील के ग्राम गढ़उमरिया में शिविर का जायजा लेते हुए व्यवस्थाओं को परखा और अधिकारियों को समयबद्ध कार्यवाही के लिए निर्देशित किया।

राजस्व पखवाड़ा इस बार तीन चरणों में संचालित किया जा रहा है—पहला चरण 1 से 15 अप्रैल, दूसरा 4 से 18 मई और तीसरा 1 से 15 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान न केवल पारंपरिक राजस्व प्रकरणों का निपटारा किया जा रहा है, बल्कि खातों में आधार और मोबाइल नंबर अपडेट करने, आरबीसी 6-4 के तहत जनहानि व फसल क्षति मामलों के त्वरित निराकरण, भू-अर्जन प्रकरणों के समयबद्ध निपटारे और स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख वितरण जैसे काम भी प्राथमिकता में हैं।

इसके अलावा, बी-1, खसरा और किसान किताब से जुड़े मामलों का मौके पर समाधान किया जा रहा है। आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के लिए लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन दर्ज कर, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवाएं देने का प्रयास भी तेज किया गया है।

जमीनी हकीकत यह है कि जहां पहले ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए तहसील कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब वही काम गांव में ही निपट रहे हैं। यही वजह है कि शिविरों में उमड़ रही भीड़ केवल संख्या नहीं, बल्कि प्रशासन पर बढ़ते भरोसे का संकेत भी है।

राजस्व पखवाड़ा फिलहाल एक अभियान भर नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव की उस दिशा का संकेत है, जहां “मौके पर समाधान” अब नारा नहीं, बल्कि अपेक्षा बन चुका है।

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Amar Chouhan

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