“गांधी की पुण्यतिथि पर शराब बिक्री: शुष्क दिवस की परंपरा टूटी, कांग्रेस का विरोध—राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़।महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को शुष्क दिवस के रूप में मनाने की वर्षों पुरानी परंपरा इस बार जिले में टूटती नजर आई। शुष्क दिवस के बावजूद शराब दुकानों के खुले रहने और शराब बिक्री जारी रहने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। कांग्रेस पार्टी ने इसे न केवल प्रशासनिक चूक बल्कि महात्मा गांधी के आदर्शों और उनके बलिदान का खुला अपमान बताया है।
इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध दर्ज कराया और संयुक्त कलेक्टर को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। पार्टी नेताओं का कहना था कि आज़ादी के बाद से 30 जनवरी को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर पूरे देश में शुष्क दिवस के रूप में मनाने की परंपरा रही है। इस दिन शराब दुकानों को बंद रखा जाना केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि गांधी जी के विचारों और नैतिक मूल्यों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
“परंपरा नहीं, संवैधानिक और नैतिक दायित्व है”
ज्ञापन में कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि शुष्क दिवस कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक चेतना से जुड़ा विषय है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में इस परंपरा की अनदेखी कर शराब बिक्री की अनुमति देना निंदनीय है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह निर्णय महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और संयम के सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है।

भाजपा सरकार पर सीधा हमला
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राजस्व के लालच में गांधी जी के आदर्शों को दरकिनार कर रही है। नेताओं का कहना था कि जिस दिन पूरा देश बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, उसी दिन शराब की दुकानें खुली रहना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। पार्टी ने इसे गांधी जी की शहादत का अपमान करार दिया।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दी है कि यदि तत्काल प्रभाव से शराब बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई और शुष्क दिवस की गरिमा बहाल नहीं की गई, तो पार्टी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल शराब बिक्री की नहीं, बल्कि गांधी जी के सपनों के अनुरूप समाज और राष्ट्र निर्माण की है।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
ज्ञापन में राज्यपाल से आग्रह किया गया है कि वे इस मामले में संज्ञान लेकर सरकार को निर्देश दें कि 30 जनवरी को शुष्क दिवस के रूप में पूरी सख्ती से लागू किया जाए और शराब दुकानों को बंद रखा जाए। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम न केवल प्रशासनिक सुधार के लिए आवश्यक है, बल्कि महात्मा गांधी के आदर्शों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी।
कुल मिलाकर, गांधी की पुण्यतिथि पर शराब बिक्री का मामला अब केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और नैतिक बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख क्या होगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।