किसान के भरोसे पर चोट, सियासत पर दाग — ठगी के मामले में जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू जेल में

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम जांजगीर-चांपा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त खलबली मच गई, जब जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू को ठगी और धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने विधायक की जमानत याचिका सिरे से खारिज करते हुए उन्हें 22 जनवरी तक जेल में रखने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई न सिर्फ एक आपराधिक प्रकरण है, बल्कि राजनीति, सत्ता और आम किसान के रिश्ते पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
पूरा मामला जांजगीर-चांपा जिले के एक किसान से जुड़ा है, जिसने अक्टूबर 2025 में थाने पहुंचकर विधायक के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। किसान का आरोप है कि विधायक बालेश्वर साहू ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से जुड़े लेन-देन में मदद का भरोसा दिलाकर उससे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए और कुछ खाली चेक अपने पास रख लिए। भरोसे के इसी रिश्ते का दुरुपयोग कर विधायक ने कथित तौर पर किसान के खातों से लाखों रुपये निकाल लिए।
पुलिस जांच में सामने आया कि हस्ताक्षरों और अंगूठे के निशान की कथित कूटरचना कर विधायक ने अपने और अपनी पत्नी के बैंक खातों में करीब 24 लाख रुपये ट्रांसफर कराए। इतना ही नहीं, कुल मिलाकर लगभग 42.78 लाख रुपये की अवैध निकासी के प्रमाण भी जांच में मिले हैं। बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और डिजिटल लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों ने मामले को और मजबूत बना दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक विश्वासघात जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया। लंबी जांच के बाद जब चार्जशीट अदालत में पेश की गई, तो कोर्ट ने उसे पर्याप्त मानते हुए विधायक की गिरफ्तारी का आदेश दे दिया।
सीजेएम कोर्ट में पेशी के दौरान विधायक पक्ष ने जमानत की पुरजोर मांग की, लेकिन अदालत ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला आर्थिक अपराध से जुड़ा है, जिसमें एक साधारण किसान के साथ बड़े पैमाने पर कथित धोखाधड़ी की गई है। ऐसे मामलों में आरोपी को जांच और न्यायिक प्रक्रिया के हित में फिलहाल हिरासत में रखना जरूरी है।
इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर विपक्ष इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बता रहा है, वहीं कांग्रेस खेमे में असहज चुप्पी देखी जा रही है। सवाल सिर्फ एक विधायक की गिरफ्तारी का नहीं है, सवाल उस भरोसे का है, जो आम आदमी—खासतौर पर किसान—अपने जनप्रतिनिधियों पर करता है।
यह मामला आने वाले दिनों में न केवल अदालत में, बल्कि राजनीतिक मंचों पर भी गर्माया रहेगा। फिलहाल, कानून ने अपना रास्ता पकड़ लिया है, और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि न्याय की कसौटी पर यह मामला किस मोड़ तक पहुंचता है।