किराए का ट्रेलर, बिकता इंजन और भरोसे की ठगी: रायगढ़ में अमानत में खयानत का बड़ा खेल उजागर

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़।
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से भरोसे, लालच और साजिश की परतें खोल देने वाला मामला सामने आया है। घरघोड़ा थाना क्षेत्र में किराए पर लिए गए ट्रेलर को बेचने और उसके इंजन की सौदेबाज़ी की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। मामला न सिर्फ आर्थिक अपराध का है, बल्कि उस मानसिकता को भी उजागर करता है, जिसमें परिचय और पेशे की आड़ में विश्वास तोड़कर संपत्ति हड़पने की कोशिश की जाती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कंचनपुर निवासी मीना चौहान ने करीब दो वर्ष पूर्व रायगढ़ के अखबर खान से एक पुराना ट्रेलर 16 लाख रुपये में खरीदा था। इसमें से 4.5 लाख रुपये की डाउन पेमेंट कर शेष राशि टाटा फाइनेंस से ऋण के रूप में ली गई थी, जिसकी मासिक किस्त 46,650 रुपये तय है।
कुछ समय बाद कागजात संबंधी परेशानी के चलते ट्रेलर होटल के पास खड़ा कर दिया गया। इसी दौरान लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम बैसकीमुड़ा निवासी परमेश्वर चौहान, जो स्वयं को ट्रांसपोर्ट कंपनियों में सुपरवाइजर बताता है, पीड़िता के संपर्क में आया। उसने भरोसा दिलाया कि वह वाहन के कागजात ठीक करवा देगा और बदले में हर महीने 85 हजार रुपये किराया देगा।
परिवार से सलाह के बाद मीना चौहान ने 20 जनवरी को ट्रेलर किराए पर दे दिया। परमेश्वर चौहान ने शुरुआत में कुछ दिन वाहन चलाकर देखने और बाद में लिखित अनुबंध करने की बात कही। लेकिन ट्रेलर हाथ में आते ही उसका मोबाइल बंद हो गया और संपर्क पूरी तरह टूट गया।
शक गहराने पर पीड़िता ने ट्रेलर में लगे जीपीएस सिस्टम के जरिए लोकेशन ट्रेस की। 5 फरवरी को जब वह बताए गए स्थान पर पहुंची, तो ट्रेलर तो मिला, लेकिन उसका इंजन गायब था। मौके पर मौजूद चालक लीलाम्बर प्रसाद से पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। चालक ने स्वीकार किया कि उसने और परमेश्वर चौहान ने मिलकर 22 जनवरी को बिलासपुर के पास ट्रेलर का डाला बेच दिया था और इंजन को भी बेचने के लिए ग्राहक तलाशने की योजना बनाई थी।
पुलिस के अनुसार, यह साफ तौर पर अमानत में खयानत और आपराधिक साजिश का मामला है। पीड़िता की शिकायत पर घरघोड़ा थाना पुलिस ने परमेश्वर चौहान और लीलाम्बर प्रसाद के खिलाफ संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि वाहन किराए पर देने या किसी भी बड़े लेन-देन में केवल मौखिक भरोसे के बजाय कानूनी प्रक्रिया और लिखित समझौते कितने ज़रूरी हैं। रायगढ़ पुलिस का कहना है कि मामले में आगे और भी खुलासे हो सकते हैं, और आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।