“कलेक्ट्रेट परिसर में काला झंडा, गांधी प्रतिमा के सामने उठा सवालों का साया: गणतंत्र दिवस पर राधेश्याम शर्मा का प्रतीकात्मक विरोध”

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़।
गणतंत्र दिवस जैसे गरिमामय अवसर पर रायगढ़ कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त अलग ही दृश्य देखने को मिला, जब सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शर्मा ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष काला झंडा लगाकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। यह विरोध नारेबाज़ी से नहीं, बल्कि मौन और संदेश के ज़रिये सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करने का प्रयास था।
राधेश्याम शर्मा ने छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री, बढ़ते प्रदूषण और सड़क दुर्घटनाओं में हो रही लगातार मौतों पर गहरी चिंता जताई। उनका कहना था कि राज्य में हालात ऐसे बनते जा रहे हैं, जहां आम नागरिक का जीवन सुरक्षित नहीं रह गया है। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग रखी।
श्री शर्मा ने कहा कि अंधाधुंध औद्योगिकीकरण और भारी वाहनों की बेतरतीब आवाजाही के कारण प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच चुका है। इसके दुष्परिणाम के रूप में असमय मौतें हो रही हैं, लेकिन इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए शासन-प्रशासन की ओर से पर्याप्त और ठोस प्रयास नजर नहीं आते।
उन्होंने शराब नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि खुलेआम शराब बिक्री से अनेकों परिवार बर्बाद हो रहे हैं, सामाजिक ताना-बाना कमजोर पड़ रहा है और अपराध व दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके बावजूद सरकार संवेदनशीलता के साथ इस मुद्दे को देखने में असफल रही है।
राधेश्याम शर्मा का कहना था कि संविधान की मूल भावना के अनुरूप शासन व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर होती दिख रही हैं और आमजन की आवाज़ को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा। इसी पीड़ा को व्यक्त करने के लिए उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक संदेश जारी कर छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर किया गया यह शांतिपूर्ण लेकिन असहज कर देने वाला प्रदर्शन यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या वास्तव में लोकतंत्र की जड़ें उतनी मजबूत हैं, जितना हम उत्सवों में दावा करते हैं। राधेश्याम शर्मा का यह विरोध भले ही विवादास्पद हो, लेकिन यह शासन व्यवस्था के प्रति बढ़ते असंतोष का एक प्रतीक जरूर बनकर सामने आया है।