“ऑपरेशन शंखनाद की गूंज: लैलूंगा पुलिस ने 10 गौवंश को तस्करी से बचाया, आरोपी सलाखों के पीछे”
Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 3 मार्च।
जिले में गोवंश संरक्षण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन शंखनाद” के तहत लैलूंगा पुलिस ने एक और अहम कार्रवाई करते हुए 10 गौवंश को अवैध तस्करी से मुक्त कराया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में की गई इस कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पशु क्रूरता और तस्करी के मामलों में अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
सूचना मिली, फौरन घेरा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक 2 मार्च को थाना लैलूंगा को मुखबिर से सूचना मिली थी कि घरघोड़ा की दिशा से छाम, रेगड़ी और कुंजारा मार्ग होते हुए एक व्यक्ति लगभग 10 नग गौवंश को बिना चारा-पानी के मारते-पीटते उड़ीसा की ओर ले जा रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी उपनिरीक्षक गिरधारी साव के नेतृत्व में टीम ने तत्काल नाकेबंदी की और संदिग्ध की तलाश शुरू कर दी।
कुंजारा के पास पकड़ा गया आरोपी
ग्राम कुंजारा के मुख्य मार्ग पर पुलिस ने एक व्यक्ति को 10 बैलों को हांकते हुए रोका। पूछताछ में उसने अपना नाम श्याम सिदार (44 वर्ष), निवासी फरसाबहार, जिला जशपुर बताया। जब परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका।
सख्त धाराओं में दर्ज हुआ मामला
जांच के बाद आरोपी का कृत्य छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6, 10 एवं 11 के तहत अपराध पाया गया। साथ ही पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 की धाराएं भी जोड़ी गईं। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 10 गौवंश (अनुमानित मूल्य लगभग 2 लाख रुपये) और एक लकड़ी का डंडा जब्त किया। थाना लैलूंगा में अपराध क्रमांक 70/2026 दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
एसएसपी का सख्त संदेश
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने दो टूक कहा —
“रायगढ़ जिले में गोवंश तस्करी और पशु क्रूरता के मामलों में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऑपरेशन शंखनाद के तहत यह अभियान सतत जारी रहेगा।”
सतर्कता ही सुरक्षा
जिले में लगातार हो रही ऐसी कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि पुलिस की निगरानी मजबूत है। साथ ही प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं गोवंश की अवैध ढुलाई या पशु क्रूरता की जानकारी मिले, तो तत्काल पुलिस को सूचित करें।
लैलूंगा की यह कार्रवाई सिर्फ कानूनी कदम नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि कानून की पकड़ से बचना आसान नहीं। जिले में गोवंश संरक्षण को लेकर प्रशासन की मंशा साफ है — अपराधियों पर शिकंजा और कानून का सख्त पालन।