ऑक्सीज़ोन के दावे, ज़मीन पर दम घुटता रायगढ़ — हवा नहीं, अब सिस्टम ज़हरीला हो चुका है

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़।
रायगढ़ को आज ऑक्सीज़ोन की नहीं, ऑक्सीजन सिलेंडर की ज़रूरत महसूस हो रही है। यह कोई भावनात्मक नारा नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत का सख्त बयान है। बीते कई महीनों से शहर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की हवा लगातार खतरनाक श्रेणी में दर्ज की जा रही है। AQI के आंकड़े डराते हैं और PM2.5 व PM10 जैसे सूक्ष्म कण अब सिर्फ पर्यावरणीय शब्द नहीं, बल्कि आम आदमी की सांस के दुश्मन बन चुके हैं।
यह स्थिति किसी मौसम परिवर्तन का परिणाम नहीं है और न ही इसे विकास की मजबूरी कहकर टाला जा सकता है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता और नियामक संस्थाओं की निष्क्रियता का नतीजा है।
हवा नहीं, ज़हर फेफड़ों में जा रहा है
शहर में सुबह की हवा अब ताज़गी नहीं, बल्कि भारीपन लेकर आती है। बच्चों की लगातार खांसी, बुजुर्गों की सांस की परेशानी और पहले से बीमार लोगों की बिगड़ती हालत इस बात का प्रमाण है कि प्रदूषण अब अदृश्य समस्या नहीं रहा। अस्पतालों में श्वसन रोगियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सवाल यह है कि इसकी जवाबदेही कौन लेगा?
उद्योग चल रहे हैं, निगरानी ठप
रायगढ़ औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है, यह किसी से छुपा नहीं। लेकिन सवाल यह है कि क्या उद्योगों को खुली छूट दे दी गई है?
धुआं उड़ रहा है, राख फैल रही है, सड़कों और बस्तियों पर काली परत जम रही है—लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के दावे फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहे। न तो नियमित मॉनिटरिंग दिखती है, न ही उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई।

विकास या विनाश?
जिस विकास की दुहाई दी जा रही है, वह अगर इंसान की सांस छीन ले, तो उसे विकास नहीं कहा जा सकता। यह मॉडल ऐसा बन चुका है, जहां उत्पादन प्राथमिकता है और जनस्वास्थ्य गौण। रायगढ़ कोई प्रयोगशाला नहीं है, जहां इंसानों को प्रयोग के तौर पर छोड़ा जाए। यहां परिवार रहते हैं, बच्चे पलते हैं, बुजुर्ग अपनी अंतिम सांस तक सम्मानजनक जीवन चाहते हैं।
चुप्पी अब अपराध है
सबसे खतरनाक बात यह है कि सिस्टम की चुप्पी इस ज़हर को और घातक बना रही है। सवाल उठाने वालों को अक्सर “विकास विरोधी” कहकर खामोश करने की कोशिश होती है। लेकिन सच यह है कि अब सवाल पूछना अपराध नहीं, चुप रहना अपराध है।
अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाला वक्त और भयावह होगा। तब रायगढ़ को हर घर में ऑक्सीज़ोन नहीं, ऑक्सीजन सिलेंडर रखने की ज़रूरत पड़ेगी।
अब ज़रूरत है सिर्फ बयानों की नहीं, ठोस कार्रवाई की—
कठोर निगरानी, पारदर्शी रिपोर्टिंग और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की।
क्योंकि यह लड़ाई किसी एजेंडे की नहीं,
रायगढ़ के लोगों की सांस की है।