एसईसीएल रायगढ़ में सुलगता असंतोष: प्रबंधन की चुप्पी से उफान पर मजदूरों का गुस्सा, संयुक्त मोर्चा ने दी निर्णायक आंदोलन की चेतावनी

रायगढ़ | 17 जनवरी 2026
http://Freelance editor Amardeep chauhan @ amarkhabar.com
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के रायगढ़ क्षेत्र में औद्योगिक शांति की नींव दरकती नजर आ रही है। वर्षों से मेहनत की चक्की में पिसते मजदूरों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच बढ़ती दूरी ने क्षेत्र को एक बार फिर टकराव की दहलीज पर ला खड़ा किया है।
बीएमएस, इंटक, एटक, एचएमएस और सीटू जैसे प्रभावशाली श्रमिक संगठनों ने अपने मतभेद भुलाकर संयुक्त मोर्चा बनाया है। यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि हालात कितने गंभीर हो चुके हैं। संयुक्त मोर्चा ने प्रबंधन पर औद्योगिक संबंधों की उपेक्षा करने और मजदूरों की आवाज को लगातार अनसुना करने का सीधा आरोप लगाया है।
संवादहीनता से उपजा संकट
संयुक्त मोर्चा का कहना है कि औद्योगिक संबंधों से जुड़े विभिन्न मंचों की बैठकें लंबे समय से नहीं बुलाई जा रही हैं। नतीजतन, मजदूरों की रोजमर्रा की समस्याएं फाइलों में दबी पड़ी हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि प्रबंधन की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करती है।
ठेका श्रमिकों की पीड़ा
ठेका श्रमिकों की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई जा रही है। आरोप है कि कई ठेकेदार नियम-कायदों को ताक पर रखकर मजदूरों से काम ले रहे हैं। समय पर भुगतान न होना, अतिरिक्त कार्य का दबाव और मानसिक उत्पीड़न जैसे मुद्दों ने श्रमिकों में गहरा आक्रोश भर दिया है।
सिविल कार्यों में अनियमितता के आरोप
संयुक्त मोर्चा ने सिविल विभाग के कार्यों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। गुणवत्ताहीन निर्माण, मानकों की अनदेखी और बिना समुचित निरीक्षण के ठेकेदारों के बिलों का भुगतान—ये सभी बातें कथित तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती हैं। संगठनों का कहना है कि इसका सीधा नुकसान कंपनी और कर्मचारियों, दोनों को हो रहा है।
सुरक्षा से खिलवाड़
खदानों में कोयला और ओबी माइनिंग के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर भी चिंता जताई गई है। मजदूरों का कहना है कि असुरक्षित हालात में काम कराना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। सवाल यह है कि क्या किसी दुर्घटना के बाद ही व्यवस्था जागेगी?
प्रशासनिक कार्यशैली पर नाराजगी
क्षेत्रीय स्टाफ ऑफिसर (एचआर) ए.डी. टंडन की कार्यप्रणाली को लेकर भी असंतोष खुलकर सामने आया है। संयुक्त मोर्चा का आरोप है कि उनकी कार्यशैली श्रमिक हितों के अनुकूल नहीं है और इससे हालात और बिगड़ रहे हैं।
आंदोलन की दहलीज पर रायगढ़
संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इन ज्वलंत मुद्दों पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
संयुक्त मोर्चा के एक प्रतिनिधि ने दो टूक कहा—
“मजदूरों की समस्याओं का समाधान न होना प्रबंधन की विफलता है। यदि हमारी मांगों पर अब भी ध्यान नहीं दिया गया, तो होने वाले किसी भी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।”
रायगढ़ क्षेत्र में फिलहाल हालात तनावपूर्ण हैं। सवाल सिर्फ मजदूरों की मांगों का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी है जो किसी भी औद्योगिक इकाई की सबसे बड़ी पूंजी होता है। अब देखना यह है कि प्रबंधन समय रहते हालात संभालता है या फिर यह असंतोष एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेता है।