एनटीपीसी लारा पावर प्लांट: देश का “सबसे बड़ा” प्रोजेक्ट या पर्यावरणीय खतरा?

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com
रायगढ़, 15 मार्च 2026:
एनटीपीसी लारा में 2×800 मेगावाट की नई यूनिट लगाने का तीसरा चरण तेज़ी से चर्चा में है, जिससे संयंत्र की कुल क्षमता 4800 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। आधिकारिक विज्ञप्तियों के मुताबिक यह देश का सबसे बड़ा पावर प्लांट होगा। लेकिन स्थानीय समुदाय और पर्यावरण विशेषज्ञ इस “रिकॉर्ड‑तोड़” प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर चिंता जताते रहे हैं।
सवाल अब भी लटका हुआ है: जनसुनवाई कब होगी?
सीईसीबी ने कलेक्टर को तीसरे चरण की जनसुनवाई कराने का निर्देश दिया है, लेकिन सटीक तारीख अभी तक घोषित नहीं हुई।
बिना जनसुनवाई के, प्रभावित गांवों के लोग अपने सवाल और आपत्तियाँ दर्ज नहीं कर पाएंगे।
नौ गांवों से करीब 2857 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है, लेकिन अब भी स्थानीय किसानों और ग्रामीणों में असंतोष है।
पर्यावरण और तकनीकी दावे
एनटीपीसी का दावा है कि सुपर क्रिटिकल तकनीक और FGD सिस्टम प्रदूषण कम करेंगे।
लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि इतने बड़े पैमाने का संयंत्र आसपास की जमीन, जल स्रोत और स्थानीय पारिस्थितिकी पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
रोड से कोयला परिवहन बंद करने का निर्णय कुछ हद तक मददगार हो सकता है, लेकिन कोयला खदान और प्लांट संचालन से निकलने वाले प्रदूषण की पूरी तस्वीर अभी अस्पष्ट है।
असंतोष के कारण
1. जनसुनवाई का विलंब: स्थानीय लोग और पर्यावरण संगठन तर्क कर रहे हैं कि बिना सुनवाई के मंजूरी देना अस्वीकार्य है।
2. भूमि अधिग्रहण विवाद: नौ गांवों की भूमि में से कई किसानों ने अब भी शिकायत दर्ज की है।
3. सत्यापन और पारदर्शिता का अभाव: प्रोजेक्ट का डेटा और पर्यावरणीय प्रभाव रिपोर्ट आम जनता तक पूरी तरह नहीं पहुंचा।
संक्षेप में: एनटीपीसी लारा का तीसरा चरण केवल बिजली उत्पादन का मामला नहीं, बल्कि यह स्थानीय जनता के अधिकार, पारिस्थितिकी और प्रशासनिक पारदर्शिता का भी मामला बन गया है। जनसुनवाई और पर्यावरणीय मंजूरी के सही समय की घोषणा के बिना, यह प्रोजेक्ट विवादों से खाली नहीं रहेगा।