एक सुबह, दो क्लिक और उड़ गई जिंदगी भर की कमाई

Freelance editor Amardeep chauhan @ amarkhabar.com
लैलूंगा में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, HDFC खाताधारक से 2.61 लाख की सेंध, बैंकिंग सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
लैलूंगा (रायगढ़)।
डिजिटल इंडिया के चमकदार दावों के बीच साइबर अपराध का अंधेरा लगातार गहराता जा रहा है। लैलूंगा से सामने आया ताज़ा मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि यह बताता है कि अब पढ़े-लिखे, जागरूक और जिम्मेदार अधिकारी भी साइबर ठगों के निशाने पर हैं।
थाना लैलूंगा क्षेत्र अंतर्गत HDFC बैंक शाखा लैलूंगा के खाताधारक फ्लेस्वर पैंकरा, जो कि वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, उनके खाते से महज़ कुछ ही मिनटों में ₹2 लाख 61 हजार की राशि गायब हो गई। यह रकम किसी गलती, लापरवाही या ओटीपी साझा करने से नहीं, बल्कि पूरी तरह सुनियोजित साइबर ठगी के जरिए उड़ाई गई—ऐसा स्वयं पीड़ित का कहना है।
पल भर में खाली हो गया खाता
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना 12 जनवरी 2026 की सुबह लगभग 9:13 बजे की है। पीड़ित के HDFC खाता क्रमांक 50100711642211 से बिना किसी सूचना, सहमति या अनुमति के दो ऑनलाइन ट्रांजेक्शन किए गए।
पहला ट्रांजेक्शन RTGS के माध्यम से ₹2,00,000 (संदर्भ संख्या: HDFC-52026011255852958) का हुआ, जबकि दूसरा ट्रांजेक्शन IMPS के जरिए ₹61,000 (संदर्भ संख्या: 601209197179) का था।
इस तरह कुल ₹2,61,000 की राशि साइबर ठगों ने चंद मिनटों में निकाल ली।

“न ओटीपी दिया, न पिन… फिर पैसा कैसे गया?”
पीड़ित फ्लेस्वर पैंकरा का कहना है कि उन्होंने न तो किसी को ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा की, न ही किसी को चेक दिया। इसके बावजूद खाते से रकम निकल जाना बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
घटना की जानकारी मिलते ही पीड़ित के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसका शिकायत क्रमांक 33301260001150 है। इसके साथ ही HDFC बैंक की हेल्पलाइन 18002586161 पर भी शिकायत की गई, जहां से Case Reference Number 91512290 जारी किया गया।
शिकायत के बाद भी राहत नहीं
इतनी औपचारिकताओं के बावजूद अब तक न तो ठगी गई राशि वापस हुई है और न ही कोई ठोस जवाब मिला है। इससे पीड़ित मानसिक तनाव और आर्थिक असमंजस से गुजर रहा है।
मामले को लेकर पीड़ित ने थाना प्रभारी, थाना लैलूंगा (जिला रायगढ़) को लिखित आवेदन देकर अज्ञात साइबर अपराधियों के विरुद्ध अपराध दर्ज कर उचित जांच और राशि वापसी की मांग की है। आवेदन में इसे एक सुनियोजित ऑनलाइन ठगी बताते हुए बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।

बढ़ते मामलों से दहशत
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लैलूंगा और आसपास के क्षेत्रों में साइबर ठगी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई और उदाहरणात्मक सजा के अभाव में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म “सुरक्षा की गारंटी” देते हैं, तो फिर ऐसी घटनाएं आखिर कैसे हो रही हैं?
एक व्यक्ति नहीं, पूरी व्यवस्था कटघरे में
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की मेहनत की कमाई लुटने का नहीं है, बल्कि यह साइबर सुरक्षा, बैंकिंग निगरानी और पुलिस की तत्परता की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस और बैंक प्रशासन कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करते हैं, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगे।
फिलहाल यह घटना हर बैंक उपभोक्ता के लिए एक कड़ा सबक है—
डिजिटल सुविधाएं जितनी आसान हैं, खतरे उतने ही खामोश और घातक।
सतर्कता ही आज सबसे बड़ी सुरक्षा है।
News associate Yogesh chauhan