Latest News

उद्योगों की रफ्तार में कुचलती ज़िंदगियाँ: प्लांट रोड पर मौत का अनकहा सच

Freelance editor Amardeep chauhan @ http://amarkhabar.com

रायगढ़। उद्योग प्लांट रोड अब किसी एक हादसे की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह मार्ग धीरे-धीरे एक ऐसे खतरनाक सिलसिले में बदल चुका है, जहाँ रोज़मर्रा की दुर्घटनाएँ खबर भी नहीं बन पा रहीं। व्यस्तता, उत्पादन और मुनाफे के नाम पर यहाँ इंसानी जानों का हिसाब तक नहीं रखा जा रहा। यह वही सड़क है, जिस पर पिछले दो से ढाई दशक से भारी उद्योग, माइंस और कोयला ट्रेलरों का दबाव लगातार बढ़ता गया, लेकिन बुनियादी ढांचे के नाम पर हालात जस के तस बने रहे।

क्षेत्र में अनगिनत उद्योग स्थापित हैं। दिन-रात कोयले से लदे ट्रेलर, भारी वाहन और मशीनरी इस संकरे मार्ग से गुजरते हैं। इसके बावजूद आज तक इस सड़क को फोरलेन करने की ठोस पहल नहीं हो पाई। नतीजा यह है कि हर कुछ दिनों में किसी न किसी परिवार का चिराग इसी मार्ग पर बुझ जाता है, और व्यवस्था कुछ देर शोक जताकर फिर खामोश हो जाती है।

प्रेस रिपोर्टर क्लब के संरक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता श्याम गुप्ता ने इस स्थिति को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह मौन सबसे खतरनाक है। “आज लोग सोचते हैं कि हादसा किसी और के साथ हुआ है, लेकिन यह नहीं समझते कि कल वही पारी हमारी भी हो सकती है।” उनका यह कथन किसी चेतावनी से कम नहीं, बल्कि एक कड़वी सच्चाई है जिसे अनदेखा किया जा रहा है।

श्याम गुप्ता का स्पष्ट मानना है कि इतने बड़े औद्योगिक क्षेत्र में बिना फोरलेन सड़क के भारी ट्रेलरों का संचालन अपने आप में दुर्घटनाओं को खुला न्योता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सड़क हादसे के बाद अक्सर मोटरसाइकिल और कार चालकों की शराब या नशे की जांच तुरंत कर ली जाती है, लेकिन कोयला ट्रेलर चालकों की नियमित और सख्त जांच क्यों नहीं होती। क्या भारी वाहन चलाने वालों पर नियम लागू नहीं होते?

उन्होंने मांग की कि कोयला ट्रेलरों की रोज़ाना नशा जांच अनिवार्य की जाए, गति सीमा का कड़ाई से पालन कराया जाए और उद्योग प्रबंधन की भी जवाबदेही तय हो। साथ ही, वर्षों से लंबित फोरलेन सड़क निर्माण को प्राथमिकता में लेकर तुरंत कार्य शुरू किया जाए।

आज सवाल सिर्फ सड़क का नहीं है, सवाल उस सोच का है जहाँ विकास की आड़ में आम आदमी की जान को सबसे सस्ता मान लिया गया है। अगर अब भी प्रशासन, उद्योग प्रबंधन और जनप्रतिनिधि नहीं जागे, तो यह मार्ग सिर्फ उद्योगों का नहीं, बल्कि लगातार बढ़ती मौतों का रास्ता बनता चला जाएगा। और तब जिम्मेदारी तय करना शायद किसी के लिए भी आसान नहीं होगा।

Amar Chouhan

AmarKhabar.com एक हिन्दी न्यूज़ पोर्टल है, इस पोर्टल पर राजनैतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, देश विदेश, एवं लोकल खबरों को प्रकाशित किया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित आस पास की खबरों को पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़ पोर्टल पर प्रतिदिन विजिट करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button