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तमनार हिंसा के बाद कड़ी कार्रवाई, लेकिन सवालों के घेरे में शासन–प्रशासन की भूमिका

फ्रीलांस एडिटर अमरदीप चौहान/अमरखबर.कॉम रायगढ़, 3 जनवरी 2026।
तमनार थाना क्षेत्र के सीएचपी चौक, लिब्रा में हुए बहुचर्चित हिंसक घटनाक्रम के बाद रायगढ़ पुलिस ने आखिरकार सख्त रुख अपनाते हुए महिला आरक्षक पर जानलेवा हमला, बदसलूकी और अमानवीय कृत्य के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, इस कार्रवाई के साथ ही शासन–प्रशासन की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिन्हें लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मंगल राठिया, चिनेश खमारी, प्रेमसिंह राठिया, कीर्ति श्रीवास (सभी निवासी ग्राम आमगांव) तथा वनमाली राठिया (निवासी ग्राम झरना) शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है और उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक चूक और समय रहते हालात को नियंत्रित न कर पाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। दरअसल, गारे–पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान के शुभारंभ को लेकर 8 दिसंबर 2025 को धौराभांठा बाजार मैदान में आयोजित जनसुनवाई के विरोध में खदान प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से सीएचपी चौक, लिब्रा में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। आर्थिक नाकेबंदी के कारण राष्ट्रीय और स्थानीय मार्गों पर आवागमन ठप हो गया था।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने लंबे समय तक चले धरने के दौरान प्रशासन ने संवाद और समाधान के बजाय हालात को टालने की नीति अपनाई। 27 दिसंबर 2025 को जब अचानक पुलिस-प्रशासन ने मार्ग खुलवाने की कार्रवाई की, तब भीड़ उग्र हो गई और हालात बेकाबू हो गए। इसी दौरान पुलिस बल पर हमला हुआ, कई जवान घायल हुए और महिला आरक्षक के साथ जो हुआ, उसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया।

पुलिस के अनुसार आरोपियों ने महिला आरक्षक पर लाठी-डंडों से हमला किया, आपत्तिजनक और अमानवीय व्यवहार किया, कपड़े फाड़े तथा लूटपाट तक की। इस गंभीर मामले में थाना तमनार में अपराध क्रमांक 309/25 दर्ज कर भा.न्या.सं. की कई संगीन धाराओं के साथ आईटी एक्ट की धारा 67(ए) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

हालांकि, घटना के बाद उठ रहे सवाल भी कम गंभीर नहीं हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते धरना स्थल पर संवेदनशीलता से संवाद करता, तो हालात हिंसक मोड़ तक नहीं पहुंचते। कुछ लोग इसे प्रशासनिक विफलता मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

रायगढ़ पुलिस का कहना है कि महिला आरक्षक के साथ हुई घटना के एक-एक पहलू की गहन विवेचना की जा रही है और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, शासन–प्रशासन पर आरोपों के बीच यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि जवाबदेही और संवेदनशील प्रशासन की कसौटी बन चुका है।

समाचार सहयोगी सिकंदर चौहान

Amar Chouhan

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